मुलायम सिंह जी की समाजवादी पार्टी एक नए प्रकार के समाजवादी रास्ते पर चल पड़ी है। वो है जनता के पैसे को वोट बैंक की राजनीति पर कुर्बान करने का समाजवाद।
कल हुई बदांयू की रैली में मुलायम जी ने लोकतंत्र को भीडतंत्र समझ कर ये कह दिया की 26 सीटो वाले गुजरात का नेता प्रधानमन्त्री नहीं बन सकता प्रधानमन्त्री तो 80 सीटो वाले उत्तर प्रदेश का नेता ही बन सकता है। ये कैसा आकलन है??
545 सदस्यो वाली लोकसभा क्या सिर्फ 80 सीट से निर्धारित होगी???
ये कैसी क्षेत्रवाद की गन्दी राजनीति है???
देश एक राज्य से नहीं बना है इस देश में 28 राज्य है 121 करोड़ की आबादी।
यूपी की जनसंख्या 20 करोड़ है जिसमे 2012 के विधानसभा के चुनाव में सपा को 29% वोट मिले अर्थात 58000000 लोगो का साथ। फिर ये किस प्रकार का आकलन है?
आप लोकपाल का विरोध करते है, महिला आरक्षण का विरोध करते है वो भी बहुत की अभद्र सीटी बजा कर। क्या इस प्रकार के नेता का प्रधानमंत्री पद के बारे में सोचना भी ठीक है???
यूपी की हालत ख़राब कर रखी है इस सपा सरकार ने। ये देश क्या सम्भाल लेंगे। जिनसे एक प्रदेश की तरक्की नहीं हो रही वो क्या देश को आगे ले जाएंगे!!!
वोट बैंक की राजनीति ने इस देश का बंटाधार कर दिया। चुनाव का समय आते ही सबको जाट मुस्लिम दलित और हर उस वर्ग की याद आ जाती है जो वोट की राजनीति में महत्त्व है। किसी को आदिवासियों गरीबो और महिलायों की फ़िक्र नहीं है। आरक्षण याद है महगाईं नजर नहीं आ रही है।
अंत में सभी पढने वालो का दिल से धन्यवाद।
कल हुई बदांयू की रैली में मुलायम जी ने लोकतंत्र को भीडतंत्र समझ कर ये कह दिया की 26 सीटो वाले गुजरात का नेता प्रधानमन्त्री नहीं बन सकता प्रधानमन्त्री तो 80 सीटो वाले उत्तर प्रदेश का नेता ही बन सकता है। ये कैसा आकलन है??
545 सदस्यो वाली लोकसभा क्या सिर्फ 80 सीट से निर्धारित होगी???
ये कैसी क्षेत्रवाद की गन्दी राजनीति है???
देश एक राज्य से नहीं बना है इस देश में 28 राज्य है 121 करोड़ की आबादी।
यूपी की जनसंख्या 20 करोड़ है जिसमे 2012 के विधानसभा के चुनाव में सपा को 29% वोट मिले अर्थात 58000000 लोगो का साथ। फिर ये किस प्रकार का आकलन है?
आप लोकपाल का विरोध करते है, महिला आरक्षण का विरोध करते है वो भी बहुत की अभद्र सीटी बजा कर। क्या इस प्रकार के नेता का प्रधानमंत्री पद के बारे में सोचना भी ठीक है???
यूपी की हालत ख़राब कर रखी है इस सपा सरकार ने। ये देश क्या सम्भाल लेंगे। जिनसे एक प्रदेश की तरक्की नहीं हो रही वो क्या देश को आगे ले जाएंगे!!!
वोट बैंक की राजनीति ने इस देश का बंटाधार कर दिया। चुनाव का समय आते ही सबको जाट मुस्लिम दलित और हर उस वर्ग की याद आ जाती है जो वोट की राजनीति में महत्त्व है। किसी को आदिवासियों गरीबो और महिलायों की फ़िक्र नहीं है। आरक्षण याद है महगाईं नजर नहीं आ रही है।
अंत में सभी पढने वालो का दिल से धन्यवाद।
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